आखिर क्यों विराट चैन्नई टेस्ट मैच में सुरक्षित खेलना चाहते हैं ?

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Pic Source : AFP

फुटबॉल एक बहुत ही सूंदर खेल हैं और क्रिकेटर्स भी इसके आदि हैं लेकिन भारत ने इस पर लगाम लगा राखी हैं वो भी सिर्फ बॉल सेंस की वजह से | बहुत सी अंतरराष्टीय टीम इस खेल का उपयोग करती हैं और टीम इंडिया भी काफी समय से ऐसा कर रही हैं |

टीम इंडिया के सिमित ओवरों के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का भी पहला प्यार फुटबॉल ही हैं और ऐसा बहुत से मौको पर देखा गया हैं जब वह मैदान में अभ्यास के दौरान अपने टीम के साथियो के साथ फुटबॉल खेलते हैं |

भारतीय खिलाड़ियों के लिए फुटबॉल के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ हैं | विराट कोहली ने कहा हैं की विवेक खेल के लिए जुनून के आगे आता और वे ये कभी नहीं चाहते हैं की वे घायल हो |

इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम टेस्ट से पहले एक संवाददाता सम्मेलन में विराट कोहली ने कहा हैं की, “मेरे टीम में आने से पहले फुटबॉल खेल जा रहा हैं | लेकिन बीच में इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया क्योंकि एक जोड़ी इस खेल में घायल हो गई थी |”

मैंने कहा की हम उच्च तीव्रता से फुटबाल नहीं खेल सकते, लेकिन केवल एक संशोधित संस्करण, पैर-वॉली नहीं खेलेंगे | जो लोग अधिक रैकेट के खेल की तरह क्रिकेट खेलते हैं | यह आपको बॉल को हासिल करने की भावना को बढ़ाता हैं | हमे बैडमिंटन और टेनिस खेलना पसंद हैं | इसमें में भी फुटबाल का ही मामला होता हैं |

“यह एक प्राकृतिक खेल हैं, जब आप युवा अवस्था में होते हैं तो आप में एक सनक होती हैं की आप गेंद को किक मरे | इसका निर्माण कौतुहल से होता हैं | यह धीरज के लिए आंच हैं लेकिन ज्यादा जोखिम उठाके खेलना अच्छा नहीं नहीं इसलिए जरुरी हैं की आप नियंत्रण रखे और खेले |”

यह सिर्फ फुटबाल नही हैं बल्कि मैच में खिलाड़ियों दिया दुःख भी हैं | साल 2005 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान मोहाली में खो-खो खेलते हुए युवराज सिंह को एक गंभीर घुटने की चोट का सामना करना पड़ा था |

खेल संपर्क मुक्त रखते हुए भी बस्ट अप की तरह बचने में मदद करता है, जैसा की पकिस्तान के वहाब रियाज और यासिर शाह के बीच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गुरूवार से शुरू हुए ब्रिस्बेन में दिन-रात टेस्ट से पहले हुआ हैं |

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