चैंपियन्स ट्रॉफी में भारत की भागीदारी पर खतरे की सम्भावना

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Pic Source : Gettyimages

जून में लंदन में होने वाली आईसीसी की वाषिर्क आम बैठक तक ‘बिग थ्री’ राजस्व ढांचा प्रारूप को बनाये रखने के लिये बीसीसीआई ने आईसीसी बोर्ड से कहने का प्रस्ताव मंगलवार (18 अप्रैल) को सर्वसम्मति से पारित किया |

चैंपियन्स ट्रॉफी में भारत की भागीदारी पर आईसीसी बोर्ड की बैठक के बाद ही फैसला होगा, लेकिन मंगलवार को बीसीसीआई की विशेष आम सभा में उपस्थित अधिकतर सदस्य किसी तरह के कड़ा फैसला करने के पक्ष में नहीं थे | खबरों के मुताबिक 27 और 28 अप्रैल को संयुक्त सचिव और बोर्ड के प्रतिनिधि अमिताभ चौधरी आईसीसी की दुबई में होने वाली बोर्ड बैठक में बीसीसीआई का पक्ष रखेंगे |

एक शीर्ष अधिकारी ने कहा हैं, “एसजीएम के एक प्रस्ताव पारित किया गया कि हम आईसीसी से वर्तमान मॉडल को बरकरार रखने के लिये कहेंगे जिसके अनुसार ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत को राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता है | हम लंदन बैठक के दौरान निश्चित तौर पर नये मॉडल पर काम करेंगे | आज यह सर्वसम्मति से पारित किया गया |”

अपनी तरफ से चौधरी ने सिर्फ इतना कहा कि भारत के हितों की रक्षा करना उनका मुख्य उद्देश्य होगा | उन्होंने कहा की, “सीओए ने एक फार्मूला दिया है जो कि भारत के लिये लाभकारी है | हम इसको भी ध्यान में रखेंगे |”

चौधरी से पूछे जाने पर कि क्या चैंपियन्स ट्रॉफी से हटना एक विकल्प है, तो उन्होंने कहा की, “केवल कवि और दार्शनिक ही इसका जवाब दे सकते हैं |” सभी सदस्यों का इस बीच विचार था कि बोर्ड इकाईयों को बाधा उत्पन्न करने के बजाय सीओए के साथ सहयोग करना चाहिए |

सूत्रों ने कहा हैं की, “एन श्रीनिवासन के विरोध में कई स्वर उठे जिनका कहना था कि बीसीसीआई को सीओए का पक्ष मजबूत करना चाहिए |” एसजीएम में तमिलनाडु क्रिकेट संघ और सौराष्ट्र क्रिकेट संघ के किसी भी सदस्य ने हिस्सा नहीं लिया | श्रीनिवासन और निरंजन शाह 70 साल से अधिक उम्र होने के बावजूद पिछली बैठक में उपस्थित हुए थे | मंगलवार की बैठक में 70 साल से अधिक उम्र के सदस्य केवल ओड़िशा के आशीर्वाद बेहड़ा थे | लोकपाल नियुक्त करने पर भी बात हुई हैं |

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